आदित्य धर द्वारा निर्देशित और रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे सितारों से सजी 'धुरंधर' की OTT रिलीज़ एक जश्न होना चाहिए था, पर यह एक सबक बन गया। दुनिया भर में 1300 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई करके बॉक्स ऑफिस पर विजय पताका फहराने वाली इस स्पाई थ्रिलर का जब नेटफ्लिक्स पर आगमन हुआ, तो उम्मीदें आसमान पर थीं। प्रशंसक उस सिनेमाई अनुभव को फिर से जीने के लिए तैयार थे जिसने बड़े पर्दे पर तहलका मचा दिया था।
लेकिन यह जश्न जल्द ही गहरी निराशा में बदल गया। दर्शकों का स्वागत फिल्म के अनकट संस्करण से नहीं, बल्कि एक ऐसे संस्करण से हुआ जो छोटा और सेंसर किया हुआ था। एक फिल्म जिसने वैश्विक मंच पर अपनी धाक जमाई, वह अपने ही सबसे समर्पित प्रशंसकों को OTT पर संतुष्ट नहीं कर सकी। आइए उन तीन प्रमुख कारणों की पड़ताल करें जिन्होंने इस बहुप्रतीक्षित डिजिटल रिलीज़ को एक बड़े विवाद में बदल दिया।
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| 'A' सर्टिफिकेट के बाद भी OTT पर क्यों म्यूट की गई 'धुरंधर'? |
1. 10 मिनट का रहस्य: थिएटर से OTT तक फिल्म छोटी क्यों हो गई?
विवाद की पहली चिंगारी फिल्म की लंबाई में आए अंतर से भड़की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिनेमाघरों में 'धुरंधर' की लंबाई 3 घंटे 34 मिनट थी। इसके विपरीत, नेटफ्लिक्स पर जारी किए गए संस्करण का रनटाइम केवल 3 घंटे 25 मिनट है। इसका सीधा मतलब है कि फिल्म से लगभग 10 मिनट का फुटेज हटा दिया गया है।
यह कटौती दर्शकों के लिए एक बड़ा झटका थी क्योंकि OTT प्लेटफॉर्म को अक्सर किसी फिल्म का स्थायी और संपूर्ण घर माना जाता है। दर्शक यह उम्मीद करते हैं कि उन्हें यहां फिल्म का मूल, बिना कांट-छांट वाला संस्करण या 'डायरेक्टर्स कट' देखने को मिलेगा। ऐसे में, बिना किसी स्पष्टीकरण के फुटेज हटाना दर्शकों के विश्वास के साथ एक तरह का धोखा है, जिसने उनकी निराशा को और बढ़ा दिया।
फिल्म की लंबाई में कटौती तो महज़ शुरुआत थी। असली हैरानी तो तब हुई जब दर्शकों ने 'A' सर्टिफिकेट के बावजूद सेंसरशिप का अनुभव किया।
2. 'A' सर्टिफिकेट का अपमान: OTT पर सेंसरशिप का क्या काम?
शायद सबसे परेशान करने वाली बात यह थी कि 'A' (केवल वयस्कों के लिए) सर्टिफिकेट प्राप्त होने के बावजूद, फिल्म को नेटफ्लिक्स पर भारी सेंसरशिप का सामना करना पड़ा। दर्शकों ने पाया कि फिल्म में कई अपशब्दों को म्यूट कर दिया गया था। यही नहीं, "बलोच" और "इंटेलिजेंस" जैसे राजनीतिक और सामरिक संदर्भों को भी आवाज़-विहीन कर दिया गया।
यह कदम एक मौलिक विरोधाभास को उजागर करता है। 'A' सर्टिफिकेट का उद्देश्य ही कंटेंट को परिपक्व दर्शकों तक बिना बाधा के पहुंचाना है, और OTT एक ऐसा माध्यम है जहाँ दर्शक वयस्क माने जाते हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म पर शब्दों को म्यूट करना न केवल कंटेंट रेटिंग प्रणाली के उद्देश्य को कमजोर करता है, बल्कि यह वयस्क दर्शकों के साथ बच्चों जैसा व्यवहार करने जैसा है। एक दर्शक ने इस मुद्दे पर सटीक टिप्पणी करते हुए लिखा:
एक 'A' रेटेड फिल्म को रिलीज करने का क्या मतलब है अगर सब कुछ म्यूट ही कर दिया गया है? OTT से तो हमें अनकट संस्करण मिलने की उम्मीद होती है।
3. दर्शकों का गुस्सा और बड़ा सवाल: 'एनिमल' को छूट, तो 'धुरंधर' को क्यों नहीं?
इन कटौतियों और सेंसरशिप के बाद, सोशल मीडिया पर दर्शकों का गुस्सा फूट पड़ा और कई लोगों ने OTT संस्करण को एक "बड़ी निराशा" करार दिया। इस बहस के केंद्र में एक बड़ा और उद्योग-प्रासंगिक सवाल उभरा: भारतीय OTT प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप के दोहरे मानदंड क्यों हैं? दर्शकों ने तुरंत अन्य फिल्मों से तुलना करनी शुरू कर दी। एक प्रशंसक ने वह सवाल पूछा जो सबकी जुबान पर था: "अगर एनिमल और कबीर सिंह बिना किसी कट के स्ट्रीम हो सकती हैं, तो 'धुरंधर' के साथ ऐसा अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है?"
यह सिर्फ एक फिल्म के बारे में नहीं, बल्कि भारतीय OTT पर कंटेंट सेंसरशिप के लिए एक सुसंगत मानक की कमी के बारे में एक बड़ी बहस है। एक अन्य दर्शक ने इस भावना को व्यक्त करते हुए लिखा:
यहाँ देखने वाला हर कोई वयस्क है। A-रेटेड फिल्म को सेंसर करने का कोई मतलब नहीं बनता और इससे पूरा मूड खराब हो जाता है।
इन तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच, अब कई प्रशंसक फिल्म के मूल, अनसेंसर्ड कट को तत्काल जारी करने की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष: एक खोखली जीत?
'धुरंधर' की कहानी बॉक्स ऑफिस की बुलंदियों से शुरू होकर OTT की निराशा पर खत्म होती है। यह एक ऐसी फिल्म का उदाहरण है जिसने व्यावसायिक रूप से सब कुछ सही किया, लेकिन अपनी डिजिटल रिलीज़ पर उन्हीं दर्शकों को निराश कर दिया जिन्होंने इसे एक ब्लॉकबस्टर बनाया था। जो एक शानदार उत्सव होना चाहिए था, वह सेंसरशिप और कटौती के कारण एक विवाद में बदल गया।
यह घटना कंटेंट की स्वतंत्रता और दर्शकों की अपेक्षाओं पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देती है। अब बड़ा सवाल यह उठता है: क्या दर्शकों की यह तीव्र प्रतिक्रिया भविष्य में OTT प्लेटफॉर्म्स और फिल्म निर्माताओं को अपनी सेंसरशिप नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी?
