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फायदेमंद है Alcohol लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

फायदेमंद है Alcohol लेकिन इन बातों का रखें ध्यान - रिपोर्ट्स की मानें तो भारत में 25 साल से कम उम्र के हर 4 लोगों में से 1 व्यक्ति को टाइप 2 डायबीटीज है।

जहां डायबीटीज अपने आप में गंभीर समस्या है वहीं इसके के मरीजों में कई दूसरी सीरियस बीमारियों का खतरा भी होता है

जिससे उनकी जान तक जा सकती है लिहाजा इसे गंभीरता से लेना बहुत जरूरी है। इस बीमारी में खान-पान और लाइफस्टाइल पर ध्यान रखकर काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

एक लेटेस्ट रिसर्च की मानें तो मॉडरेट ड्रिंकिंग टाइप 2 डायबीटीज में फायदेमंद हो सकती है।

फायदेमंद है ऐल्कॉहॉल

यह रिसर्च चीन में हुई है इसके मुताबिक, संयमित मात्रा में शराब पीने से ब्लड ग्लूकोज और फैट मेटाबॉलिजम पर सकारात्मक असर पड़ता है। इस रिसर्च के नतीजे स्पेन में ऐनुअल मीटिंग ऑफ द यूरोपियन असोसिएसन फॉर द स्टडी ऑफ डायबीटीज में रखे गए।

ऑथर्स के मुताबिक, जिन लोगों में पहले से ही टाइप 2 डायबीटीज था उन्होंने रोजाना थोड़ी-थोड़ी शराब पी तो उनका ब्लड शुगर लेवल लो नहीं हुआ। इन लोगों ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कम हुआ।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसुलिन का कम लेवल और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने की बात सामने आई।वहीं स्टडी के लीड ऑथर चेन ने यह भी चेतावनी दी कि ऐल्कॉहॉल की ज्यादा मात्रा डायबीटीज के मरीजों के लिए रिस्क फैक्टर हो सकती है।

ऑथर्स ने बताया कि मॉडरेट ड्रिंकिंग का मतलब है, रोजाना 20 ग्राम ऐल्कॉहॉल। यह डेढ़ कैन बीयर, एक बड़ा ग्लास वाइन के बराबर हो सकता है।

हममें से जो लोग कभी-कभी बीयर या शराब के एक-दो ड्रिंक्स पीते हैं, वो मानते हैं कि इससे हमारे शरीर को नुकसान नहीं फ़ायदा होता है।

जब कोई ऐसा अध्ययन सामने आता है जिससे संकेत मिलें कि कम मात्रा में शराब पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है तो मीडिया और आम लोग भी इसका बड़े उत्साह से स्वागत करते हैं।

फायदेमंद है ऐल्कॉहॉल

लेकिन कम मात्रा में भी शराब पीने से स्वास्थ्य को कोई फ़ायदा होता है, ये तय करना बहुत ही जटिल काम है।

सबूतों के आधार पर दवा देने की प्रक्रिया के जनक माने जाने वाले आर्ची कोक्रेन ने एक शुरुआती अध्ययन में पाया था कि शराब के सेवन और स्वास्थ्य में रिश्ता है।

उन्होंने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर 18 विकसित देशों में हृदय संबंधी बीमारियों से होने वाली मौत की असली वजह जानने की कोशिश की थी।

हृदय रोग से रिश्ता :

आर्ची कोक्रेन ने अपने विश्लेषण में पाया कि शराब ख़ासकर वाइन का सेवन बढ़ाने का हृदय रोग से स्पष्ट रिश्ता है।कोक्रेन और उनके साथियों ने वर्ष 1979 में पता लगाने की कोशिश की थी कि अलग-अलग लोगों में हृद्य रोग से मौत की दर अलग क्यों है।

उनके मुताबिक शराब बनाने में जिन दूसरे तत्वों का समावेश होता है, उनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट या फिर पौधों के पॉलीफेनॉल फ़ायदेमंद होते हैं।

वर्ष 1986 में शोधकर्ताओं के दल ने अमरीका में 50 हज़ार से ज़्यादा पुरुष डॉक्टरों का सर्वे किया. इसमें उनके खाने-पीने की आदतों, उनके चिकित्सीय इतिहास और स्वास्थ्य की स्थिति पर दो साल तक नजर रखी गई।

इस अध्ययन में पाया गया था कि जो डॉक्टर ज़्यादा शराब पीते थे, उनमें कोरोनरी हार्ट बीमारियां कम होती हैं।

कम पीने वाले वैसे भी ज़्यादा सतर्क ?

वर्ष 2000 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के मुताबिक अगर आप एक स्टैंडर्ड ड्रिंक लेते हैं तो सप्ताह में ड्रिंक्स नहीं लेने वालों की तुलना में आपकी मौत की आशंका कम है।

फायदेमंद है ऐल्कॉहॉल

इस अध्ययन के मुताबिक शराब की खपत और हृदय रोग के बीच ऐसा रिश्ता है कि जो लोग इसका सेवन सोच-समझकर कम मात्रा में करते हैं, उनके हृद्य रोग से मरने की संभावना उन लोगों से कम है जो लोग रोज़ाना काफ़ी ज़्यादा शराब पीते हैं।

लेकिन कम शराब पीने वालों में क्या केवल शराब का सेवन फायदेमंद है या फिर ये लोग अपने स्वास्थ्य के बारे में वैसे ही काफ़ी सतर्क होते हैं. क्या कम शराब पीने वाले ये लोग नियमित तौर पर शारीरिक व्यायाम करते हैं,

संतुलित भोजन लेते हैं और ख़ुद का वैसे भी ख्याल रखते हैं ?

वर्ष 2005 में मेडिकल प्रोफेशनलों के बीच एक अध्ययन हुआ. इसमें 32 हज़ार महिलाएं और 18 हज़ार पुरुष शामिल थे. इसमें यह जानने की कोशिश की गई कि शराब के सेवन का हार्ट अटैक के ख़तरे से और शरीर पर होने वाले असर से क्या संबंध है।

जो लोग सप्ताह में तीन-चार बार, एक या दो पेग शराब पीते हैं, उनमें हार्ट अटैक की आशंका कम होती है।

इसकी वजहों पर शोधकर्ताओं का मानना है कि शराब का गुड कॉलेस्ट्रॉल और हिमोग्लोबिन ए1सी (डायबिटीज के ख़तरे को बताने वाले मार्कर) पर असर होता होगा या फिर फाइबरिनोजेन (जो रक्त के जमने में मदद करता है) पर असर होता होगा।

अध्ययनों में बड़ी ख़ामी :

इन तीनों कारकों की मेटाबोलिक सिंड्रोम में अहम भूमिका होता है।अध्ययनों से संकेत मिले है कि संभवत: इन कारकों में बेहतर संतुलन स्थापित होता होगा।

लेकिन इसे पढ़कर आप शराब का सेवन बढ़ाना शुरू करें, उससे पहले आपको आगे कुछ और भी ज़रूर पढ़ लेना चाहिए।

तो क्या शराब नहीं पीने वालों में शराब के एक या दो पेग रोजाना पीने वालों की तुलना में मौत का ख़तरा ज़्यादा होता है? इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है।

फायदेमंद है ऐल्कॉहॉल लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

2006 में शोधकर्ताओं के एक दल ने इन अध्ययनों की गंभीरता से समीक्षा की. इन लोगों ने इन अध्ययनों में एक बड़ी खामी देखी ।

इसमें शराब का सेवन नहीं करने वालों में वे लोग शामिल थे जो बीमारी और बढ़ती उम्र जैसी वजहों से शराब पीना छोड़ चुके थे।

ऐसे में इन लोगों का स्वास्थ्य आम लोगों की तुलना में बेहतर हो, इसकी कोई संभावना नहीं है.एक दूसरे अध्ययन में भी इस खामी को दूर करने की कोशिश की गई. इसी साल ब्रिटेन के लोगों पर अध्ययन किया गया।

शराब को पचाने की ख़ासियत :

इसके मुताबिक अगर केवल शराब की खपत और स्वास्थ्य की तुलना करेंगे तो आपको सीमित मात्रा में शराब के सेवन का फ़ायदा दिखेगा।

लेकिन यदि इन अध्ययनों में से शराब न पीने वाले उन लोगों को निकाल दिया जाए जो पहले शराब पीते रहे थे, तो शराब पीने का कोई फ़ायदा नहीं दिखेगा।

एक दूसरे दल ने उन लोगों पर भी अध्ययन किया जिनका शरीर शराब को ठीक से पचा नहीं पाता है।इनमें वे लोग शामिल थे जो एकदम शराब का सेवन नहीं करते थे। इन लोगों की तुलना शराब पीने वालों के साथ की गई।

फायदेमंद है ऐल्कॉहॉल

इसके नतीजे बताते हैं कि शराब सेवन से हार्ट अटैक की आशंका बढ़े, ना बढ़े लेकिन इससे दूसरी जानलेवा बीमारियों के होने का ख़तरा जरूर बढ़ जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की बीते साल की रिपोर्ट के मुताबिक शराब सेवन से अवसाद, बेचैनी, लीवर सिरोसिस, पेनक्रियाटाइटिस, आत्महत्या की प्रवृत्ति, हिंसा और दुर्घटना जैसे मामले बढ़ जाते हैं।

शराब के सेवन से मुंह, नाक, गले, पेट, लीवर और स्तन के कैंसर का ख़तरा भी बढ़ता है। दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों में 4 से 30 फ़ीसदी मौतें शराब के सेवन के कारण होती हैं।

स्तन कैंसर में तो ये मामला 8 फ़ीसदी है. इसमें एक पेग प्रतिदिन लेने से स्तन कैंसर का ख़तरा 4 फ़ीसदी बढ़ता है जबकि ज़्यादा सेवन से ये ख़तरा 40 से 50 फ़ीसदी तक बढ़ जाता है।

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200 बीमारियों का ख़तरा :

शराब का ज़्यादा सेवन आपकी प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर करता है और इसके चलते न्यूमोनिया और टीबी होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

शराब के सेवन से यौन व्यवहार में रिस्क लेने की संभावना बढ़ जाती है और एचआईवी और दूसरी संक्रमित बीमारियां होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है।

गर्भावस्था में शराब सेवन से शिशु की ग्रोथ प्रभावित होती है।शराब सेवन से कम से कम 200 बीमारियां होने का ख़तरा होता है, इनमें से 30 तो केवल शराब पीने से ही होती हैं।

लेकिन सीमित मात्रा में शराब के सेवन से फ़ायदा होता है, यह मान्यता पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है।

शराब का सेवन बंद कराने में जुटी संस्थाएँ भी हिचकिचाते हुए मानती हैं कि कम मात्रा में शराब पीने से हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक में फ़ायदा हो सकता है।

इस रिपोर्ट के अंत में लिखा है कि शराब के हानिकारक प्रभाव होने के सबूत स्पष्ट हैं लेकिन जो सबूत मिले है, उनके मुताबिक इसके फ़ायदों को संदेह से ही देखना चाहिए।


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